आज अचानक एक ख्याल पर दिल ठहर गया,
क्या आज वाकई मैं जिंदा हूँ?
मैं समझ नहीं पाया की खुद को क्या जवाब दूँ,
शायद एक मैं ही तो हूँ जो खुद को जानता हूँ इस जहाँ में,
मैं ही तो हूँ जिसे पता है की मेरा एक हिस्सा आज भी वहां है,
जहाँ हमने एक दुसरे के हाथों में हाथ दिया था,
जब पहली बार तुमने मेरी आँखों में देख कर प्यार का इज़हार किया था,
और शायद एक हिस्सा वहां भी जहाँ से तुम्हे आखिरी बार देखा था,
अपनी ज़िन्दगी से हमेशा के लिए जाते हुए...
आज शायद दुनिया को मैं एक नज़र आता हूँ,
लेकिन उन हिस्सों का हिसाब किसे पता जो कहीं ठहर गए..
उन्हें लगता है की मैं आगे बढ़ गया हूँ,
लेकिन मैं तो जानता हूँ की मैं आज भी उसी वक़्त में ठहरा हुआ हूँ...
आज भी एक एहसास उसी लम्हे को जी रहा है जब तुम दिल के करीब थे,
शायद आज भी साँसों को उस हवा का सहारा मिला हुआ है
जब मैं खुल के साँस लिया करता था,
जब खुली हवाओं में इतनी घुटन नहीं हुआ करती थी,
जब अपनी साँसों का हिसाब नहीं रखना पड़ता था,
शायद तब.. तब मैं जिंदा था...
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