Wednesday, July 11, 2012

राहें

तुझको पाने की ख़ुशी तो है ऐ हमसफ़र,
पर उस सफ़र को क्यूँकर हम भूल जाएँ
हम तो उन राहों के भी कर्जदार हैं
जिसके जरिये तुझको हमने पा लिया
इन पुराने कागजों में दर्ज है
उस सफ़र के हर एक पल का वाकया
जिस जगह हम थे ज़रा से डगमगाए
और राहों ने हमें बढ़कर थाम लिया
बारिशों में भीगती है वो रहगुजर
जिन पे चल के हम तुम्हे ढूंढा किये
तेरे मिल जाने के वक़्त हम हैं सोचते
क्या इन राहों को भी है किसी का इंतज़ार
क्या है कोई राही ऐसा भी यहाँ
जो राहों को ही मंजिल समझ बैठे कभी...

Sunday, May 6, 2012

तेरी ख़ुशी...

एक तेरी ख़ुशी की खातिर अपने ज़ख्मों को छुपा रखा है,
तेरे हर ग़म को अपने सीने से लगा रखा है.
न आ पाए कोई आंसू तेरी आँखों में कभी,
इसलिए अपने इस दिल को अश्कों में डुबा रखा है.
यूँ तो हम भी हुआ करते थे एक कलंदर यारों,
पर तेरे इश्क ने हमें दुनिया से मिला रखा है.
कोशिशें कई बार करीं तुझको सुना दें हाल-ऐ-दिल,
पर तेरी खामोश निगाहों ने हमें बुत सा बना रखा है.
तुम समझते तो हो उस दर्द को जो बयां न हुआ,
लेकिन इस दुनिया की रवायतों से खामोश हो तुम,
हम भी बैठे हैं उस पल की हसरत लेकर,
जब कहो तुम की मेरे प्यार में क्यूँ खुद को मिटा रखा है.

Saturday, February 25, 2012

वो...



यूँ ही बैठे थे दोस्तों से घिरे हुए,
कि अचानक जिक्र उनका आ गया।
दिल फिर से उनको तड़प गया,
अश्क फिर से यूँ ही छलक उठे।
कोई पूछे तो उनको हम क्या कहें
कि हम खुश हैं या कि ये क्या हुआ,
फिर दिल ने उनको बुला लिया,
फिर नज़रों ने उनको गवां दिया।
मेरी हालत-ए-हिज्र का कुछ इस क़दर,
तमाशा सा वो हैं बना गए,
कि न हमको कभी ये खबर हुई,
कब ज़माने ने हमको भुला दिया।
बस एक ख्वाहिश ही है रह गयी,
कि इक बार फिर से उनका दीदार हो,
यूँ न हो कि अपनी रुखसती के वक़्त,
आँखें खुली रहें उनके इंतज़ार में।