वो लबों पे इठलाती इक मुख़्तसर सी हँसी,
और वो ज़ुल्फ़ों में बहकती कुछ बेबस सी हवा ,
यकीं है मुझे कि मैंने पहले भी तुझको कहीं देखा है.
कोई अरमान कोई ख़्वाब कहीं तो बसेरा है तेरा,
कोई तो इक मुकम्मल जहां जहाँ बसेरा है तेरा ,
कुछ शोख़ निगाहें एक पाकीज़ा सूरत,
और होठों पर ठहरे हुए वो नम अल्फाज़,
यकीं है मुझे कि मैंने पहले भी तुझको कहीं देखा है
