तुझको पाने की ख़ुशी तो है ऐ हमसफ़र,
पर उस सफ़र को क्यूँकर हम भूल जाएँ
हम तो उन राहों के भी कर्जदार हैं
जिसके जरिये तुझको हमने पा लिया
इन पुराने कागजों में दर्ज है
उस सफ़र के हर एक पल का वाकया
जिस जगह हम थे ज़रा से डगमगाए
और राहों ने हमें बढ़कर थाम लिया
बारिशों में भीगती है वो रहगुजर
जिन पे चल के हम तुम्हे ढूंढा किये
तेरे मिल जाने के वक़्त हम हैं सोचते
क्या इन राहों को भी है किसी का इंतज़ार
क्या है कोई राही ऐसा भी यहाँ
जो राहों को ही मंजिल समझ बैठे कभी...
पर उस सफ़र को क्यूँकर हम भूल जाएँ
हम तो उन राहों के भी कर्जदार हैं
जिसके जरिये तुझको हमने पा लिया
इन पुराने कागजों में दर्ज है
उस सफ़र के हर एक पल का वाकया
जिस जगह हम थे ज़रा से डगमगाए
और राहों ने हमें बढ़कर थाम लिया
बारिशों में भीगती है वो रहगुजर
जिन पे चल के हम तुम्हे ढूंढा किये
तेरे मिल जाने के वक़्त हम हैं सोचते
क्या इन राहों को भी है किसी का इंतज़ार
क्या है कोई राही ऐसा भी यहाँ
जो राहों को ही मंजिल समझ बैठे कभी...

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