तेरी आँखों से गिरे आंसुओं को अपने दिल में छुपा लिया हमने,
तेरा नाम भी लिया मगर दुनियाँ को सुनाया नहीं,
तेरी दोस्ती पर दिल जान भी लुटा सकते हैं हम,
फर्क ये है कभी तुझको भी हमने ये बताया ही नहीं...
क्या कहता तेरे बिन बहुत अकेला हूँ मैं,
जानता था तुझ पर ये भी एक ज़ुल्म ही हो जाता,
जो किसी ग़ैर की आँखों के आँसू न देख पाता हो,
उसको अपने दिल का दर्द दिखाता कैसे,
ऐसा तो न था की तुझको एहसास न था,
क्यूँ हमने अपना ग़म-ए-दिल तुमको सुनाया ही नहीं,
नाम हर वक़्त तेरा दिल में गूंजता रहता है,
बस कभी उसको अपनी जुबां तक लाया ही नहीं...
ये मत सोच की रिश्ता ख़त्म हो गया अपना,
बस ज़रा श़क्ल बदल गयी है उसकी,
पहले तुझे सामने देख कर जन्नत का नज़ारा करते थे,
अब अपनी यादों में ही मिल पाते हैं तुझसे,
दोस्ती कब कह कर निभाई है हमने,
ये हुनर रब ने हमको सिखाया ही नहीं,
हर वक़्त तेरे आस पास ही रहते हैं,
शायद तेरे आँसुओं में तुझको नज़र आया ही नहीं...
तेरी दोस्ती पर दिल जान भी लुटा सकते हैं हम,
फर्क ये है कभी तुझको भी हमने ये बताया ही नहीं...
तेरा नाम भी लिया मगर दुनियाँ को सुनाया नहीं,
तेरी दोस्ती पर दिल जान भी लुटा सकते हैं हम,
फर्क ये है कभी तुझको भी हमने ये बताया ही नहीं...
क्या कहता तेरे बिन बहुत अकेला हूँ मैं,
जानता था तुझ पर ये भी एक ज़ुल्म ही हो जाता,
जो किसी ग़ैर की आँखों के आँसू न देख पाता हो,
उसको अपने दिल का दर्द दिखाता कैसे,
ऐसा तो न था की तुझको एहसास न था,
क्यूँ हमने अपना ग़म-ए-दिल तुमको सुनाया ही नहीं,
नाम हर वक़्त तेरा दिल में गूंजता रहता है,
बस कभी उसको अपनी जुबां तक लाया ही नहीं...
ये मत सोच की रिश्ता ख़त्म हो गया अपना,
बस ज़रा श़क्ल बदल गयी है उसकी,
पहले तुझे सामने देख कर जन्नत का नज़ारा करते थे,
अब अपनी यादों में ही मिल पाते हैं तुझसे,
दोस्ती कब कह कर निभाई है हमने,
ये हुनर रब ने हमको सिखाया ही नहीं,
हर वक़्त तेरे आस पास ही रहते हैं,
शायद तेरे आँसुओं में तुझको नज़र आया ही नहीं...
तेरी दोस्ती पर दिल जान भी लुटा सकते हैं हम,
फर्क ये है कभी तुझको भी हमने ये बताया ही नहीं...

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